Wednesday, October 8, 2008

173 वां दिन

प्रतीक्षा, मुंबई 8 अक्टूबर, 2008 11:55 pm

"जीवन में आप यह कभी नहीं जान पाएगे कि आपको किस बात की कमी है जब तक कि वो आपको मिलती नहीं है; और आप यह कभी नहीं जान पाएगे कि आपके पास क्या है जब तक कि वो खो न जाए। इसलिए जो कुछ भी आपके पास है उसकी कद्र कीजिए।'

मैं उन सब की कद्र करता हूँ जो मेरे पास है। आप!

आप - अपना कीमती वक्त खर्च करते है मुझ तक पहुँचने के लिए और अपना प्यार और स्नेह प्रदान करते हैं। आपके जीवन में मेरी उपस्थिति को जताते हैं। मेरी गलतियों को सुधारते हैं। सुझाव देते हैं, तालियाँ बजाते हैं, मेरे साथ हँसते हैं, मेरे साथ रोते हैं। मैं आप सब का आभारी हूँ।

आप - मेरी ताकत बन गए हैं। और मेरी कमजोरी भी। मैं आप के बारे में दिन भर सोचता हूँ। क्या आपको पसंद आएगा, क्या आपका मनोरंजक लगेगा और क्या आपको कुछ ज्ञान दे जाएगा। मैं कैसे सब के साथ जुड़ सकूँ, कैसे मैं आज कुछ ऐसा लिखूँ जो आपको पढ़ने में अच्छा लगे। कैसे मैं उन सैकड़ों लोगों का उत्तर दे सकूँ जो मुझे लिखते हैं।

आप - मेरा ही एक अंग बन चुके हैं। आप मेरे दु:ख और सुख अपने साथ बांटते हैं। मेरी पोशाक और मेरी यात्रा। मेरा मूड और मेरी हरकतें। मेरे विश्वास और मेरे संबंध। मेरा काम। मेरा उत्थान और मेरा पतन।

आप - मेरा दूसरा अस्तित्व है। मैं आपसे सब कुछ खोल कर कह देता हूँ। इतना जितना मैं शायद पहले कभी नहीं करता।

आप - जिन्होंने मेरा विश्वास जीत लिया और भरोसा कर लिया और दोस्ती कर ली। और मैंने आपकी भक्ति।

आप - अद्वितीय हैं। परोक्ष और अपरोक्ष रुप से। हमने मिल कर अपनी एक दुनिया बनाई है। यद्यपि, एक छोटी सी दुनिया। लेकिन एक ऐसी दुनिया जिसमें एक बहुत बड़ी भावना समा जाती है।

मैंने इसे शुरू किया। और आप इसमें शामिल हो गए, पूरी ईमानदारी से 173 दिन से मेरे साथ हैं। मैं आपका आभारी हूँ और इसे हमेशा याद रखूँगा।

मैंने अपनी बेटी श्वेता को कहा है कि वे मेरे ब्लॉग में योगदान दे। वे एक समझदार और जीवंत दिमाग वाली है। मैं उन्हें एक विषय दूँगा लिखने के लिए। लेकिन बेहतर होगा कि आप कोई विषय दें।

तो ये रहा आपके लिए प्रश्न --

वो क्या है जिस पर आप चाहते हैं कि श्वेता टिप्पणी करें?

अपने जवाब भेजें। मैं उन्हें छाँट कर, श्वेता को प्रस्तुत कर दूँगा। फिर वे जो चाहे उसमें से चुन ले। और उसके बाद, हो सकता है कि हम एक बहस शुरु कर दे। एक ऐसी बहस जिस पर इस ब्लॉग द्वारा नज़र रखी जा सके। एक ऐसी बहस जिसका परिणाम सब देख सके।

अगर इसमें रुचि है तो मुझे बताएँ।

मैं भारी मन से विदा लेता हूँ, लेकिन बहुत प्यार के साथ -

अमिताभ बच्चन
http://blogs.bigadda.com/ab/2008/10/09/day-173/

5 comments:

gulshan said...

DEAR SIR, MERE BICHAR SE SWETA BACCHAN KO APNE CHACA MR. AZITABH BACCHAN AUR UNKI FAMILY PAR JAROOR KUCH LIKHNA CHAHIYE KYONKI HUM SAB JANANA CHAHTE HAI KI "SADI KE MAHAANAYAK" KE BHAI KE BICAR KAISE HAI?

Satyajeetprakash said...

राहुल सर, सच पूछिए तो एकबार मैं अमिताभजी के ब्लॉग पर गया पर पढ़ नहीं सका. ब्लॉग अंग्रेजी में है इसलिए समझने में थोड़ा ज्यादा वक्त लगता है. आपने हिंदी-भाषियों का काम आसान कर दिया. आपके प्रयास की हृदय से प्रशंसा करता हूं. बस जारी रखिए ये सफर.

radharaman said...

sir apnay naati potay kay baray may batay.unka palan sweta kasay karna chahaygi.nanda pariwar kay baray may bataty. apnay pati nikhil kay baray may batay.

radharaman said...

sir apnay naati potay kay baray may batay.unka palan sweta kasay karna chahaygi.nanda pariwar kay baray may bataty. apnay pati nikhil kay baray may batay.

radharaman said...

sir plz yay batay kya aap suchmuch navratna thanda -thanda cool oil lagatay hai? ya kawal advertise kay layay.boroplus cream aap lagatay hai?