Tuesday, September 30, 2008

164 वां दिन

फिल्म सिटी, मुंबई सितम्बर 29, 2008 6:30 pm

इस महानगर पर सूरज डूब रहा है। मैंने अपने छोटे से नोकिया मोबाइल से एक और तस्वीर लेली।

मैं लक्सर/पार्कर पेन की शूटिंग के लिए फिल्म सिटी में हूँ। और अब मुझे पता चल गया कि कल रात मुझे क्या परेशानी थी।
मुझे काम पर जाने की आवश्यकता थी. स्टूडियो, कैमरा, बत्तियाँ और वातावरण ने मुझे जीवंत, मजबूत और खुशहाल बना दिया है.

मैंने सोचा कि मैं जल्दी से बता दूँ आपको ये बात, अगले शाट लेने से पहले।
लेकिन मैं बाद में और अधिक विस्तार से बात करेंगे।

दुर्भाग्य से, कुछ और बुरी खबर भी है। और जो लोग भारत में हैं वे इसके बारे में कल अखबारों में पढ़ेंगे। मैं इस पर अभी कई विभिन्न कारणों की वजह से कुछ कह नहीं सकता। जब मेरे पास ज्यादा जानकारी होगी, मैं आपको ज़रूर बताऊंगा।

इसके अलावा मैं आज 'द्रोण' का ट्रायल देखने जा रहा हूँ। आप को उसकी भी खबर दूँगा। बच्चों ने 2 अक्टूबर के लिए यह बहुत बड़ा प्रयास किया है। इन बच्चों द्वारा बनाई गई फ़िल्म के लिए आपकी प्रार्थना और शुभकामनाओं की जरूरत है।

सब को प्यार,
अमिताभ बच्चन

http://blogs.bigadda.com/ab/2008/09/29/mobile-pix/#more-458

11 comments:

संगीता पुरी said...

अमिताभ बच्चन को हमारी अपनी भाषा में पढ़ा पाने की बहुत अच्छी कोशिश है आपकी.... इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

E-Guru Rajeev said...

भाई हम भी वही कहेंगे,
अमिताभ बच्चन को हमारी अपनी भाषा में पढ़ा पाने की बहुत अच्छी कोशिश है आपकी....
वैसे ब्लॉग बनाने, सजाने या ब्लॉग से कमाने सम्बन्धी कोई जानकारी चाहिए तो हम हाज़िर हैं. और आप अपने ब्लॉग पर सफलता पूर्वक लिखते रहें, शुभकामनाएं.

dhiru singh said...

bahut sunder . hindi ki kamai khane wale angreji main likh rahe hai . aur amrica main rahne wala us e hindi main anuvaad kar raha hai .

Shastri said...

हिन्दी चिट्ठाजगत में इस नये चिट्ठे का एवं चिट्ठाकार का हार्दिक स्वागत है.

मेरी कामना है कि यह नया कदम जो आपने उठाया है वह एक बहुत दीर्घ, सफल, एवं आसमान को छूने वाली यात्रा निकले. यह भी मेरी कामना है कि आपके चिट्ठे द्वारा बहुत लोगों को प्रोत्साहन एवं प्रेरणा मिल सके.

हिन्दी चिट्ठाजगत एक स्नेही परिवार है एवं आपको चिट्ठाकारी में किसी भी तरह की मदद की जरूरत पडे तो बहुत से लोग आपकी मदद के लिये तत्पर मिलेंगे.

शुभाशिष !

-- शास्त्री (www.Sarathi.info)

Shastri said...

एक अनुरोध -- कृपया वर्ड-वेरिफिकेशन का झंझट हटा दें. इससे आप जितना सोचते हैं उतना फायदा नहीं होता है, बल्कि समर्पित पाठकों/टिप्पणीकारों को अनावश्यक परेशानी होती है. हिन्दी के वरिष्ठ चिट्ठाकारों में कोई भी वर्ड वेरिफिकेशन का प्रयोग नहीं करता है, जो इस बात का सूचक है कि यह एक जरूरी बात नहीं है.

वर्ड वेरिफिकेशन हटाने के लिये निम्न कार्य करें: ब्लागस्पाट के अंदर जाकर --

Dahboard --> Setting --> Comments -->Show word verification for comments?

Select "No" and save!!

बस हो गया काम !!

प्रदीप मानोरिया said...

सार्थक नक़ल आपका चिठ्ठा जगत में स्वागत है
निरंतरता की चाहत है मेरे ब्लॉग पर आने के लिए मेरा आमंत्रण स्वीकारें कृपया जरूर पधारे

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

बहुत कठिन है टिप्पणी करना। वर्ड वेरिफिकेसन हटाऒ भाई।

DHAROHAR said...

Bahut acha pryas hai aapka.Badhai.

विनीता यशस्वी said...

padha ke achha laga

रचना गौड़ ’भारती’ said...

स्वागत है.

Anonymous said...

अमित जी
स्वागत है!